गन्ना खेती की नई तकनीक: साल में 2 बार कटाई और दोगुना मुनाफा (पूरी जानकारी)

गन्ना खेती की नई तकनीक

गन्ना खेती की नई तकनीक: साल में 2 बार कटाई और दोगुना मुनाफा (A to Z जानकारी)

लेखक: (MD News)

​भारत का किसान आज पुरानी और परंपरागत खेती छोड़कर नई तकनीकों (Modern Technology) की तरफ बढ़ रहा है। गन्ना (Sugarcane) भारत की सबसे महत्वपूर्ण नकदी फसलों में से एक है, लेकिन पुराने तरीके से खेती करने पर किसान को फसल के लिए साल भर इंतज़ार करना पड़ता है और मुनाफा भी मेहनत के हिसाब से कम होता है।

​आज के इस लेख में हम बात करेंगे गन्ने की एक ऐसी नई वैरायटी और तकनीक के बारे में, जिसने खेती की दुनिया में क्रांति ला दी है। यह तकनीक, जो मूल रूप से चीन और विकसित देशों में इस्तेमाल होती है, अब भारतीय किसानों के लिए भी उपलब्ध है। इसकी खासियत यह है कि यह कम समय में तैयार होती है, इसमें चीनी की मात्रा ज्यादा होती है, और किसान साल में दो बार तक इसका उत्पादन ले सकते हैं।

​आइये जानते हैं इस “जादुई गन्ना खेती” के बारे में A to Z पूरी जानकारी।

​1. गन्ने की इस नई वैरायटी की खासियत क्या है?

​आमतौर पर गन्ने की फसल तैयार होने में 10 से 12 महीने का समय लेती है। लेकिन कृषि वैज्ञानिकों ने कुछ ऐसी शीघ्र पकने वाली किस्में (Early Maturing Varieties) विकसित की हैं जो 8 से 9 महीने में कटाई के लिए तैयार हो जाती हैं।

इस नई तकनीक की मुख्य विशेषताएं:

  • मोटा तना: इस वैरायटी का तना (Stem) सामान्य गन्ने से काफी मोटा होता है, जिसके कारण वजन बढ़ता है।
  • ज्यादा शुगर रिकवरी: इसमें चीनी की मात्रा (Brix Value) 20% से ज्यादा होती है, जिससे चीनी मिलें इसे हाथों-हाथ खरीदती हैं।
  • रोग प्रतिरोधी: इस वैरायटी में ‘रेड रॉट’ (Red Rot) और अन्य बीमारियां लगने का खतरा ना के बराबर होता है।
  • कम पानी: आधुनिक तकनीक से पानी की बचत होती है और फसल सूखे के प्रति सहनशील होती है। गन्ना खेती की नई तकनीक

​2. खेत की तैयारी गन्ना खेती में दोगुना मुनाफा कमाने का तरीका

(Soil Preparation)

​अच्छी पैदावार के लिए खेत की सही तैयारी सबसे ज्यादा ज़रूरी है।

  • गहरी जुताई: सबसे पहले खेत की 2-3 बार गहरी जुताई (Ploughing) करें ताकि मिट्टी भुरभुरी हो जाए और हवा का संचार अच्छा हो।
  • गोबर की खाद: प्रति एकड़ कम से कम 4-5 ट्रॉली पुरानी सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट (केंचुआ खाद) मिलाएं।
  • ट्राइकोडर्मा: मिट्टी के शुद्धिकरण के लिए ‘ट्राइकोडर्मा’ का प्रयोग ज़रूर करें ताकि ज़मीन से लगने वाले फफूंद जनित रोग खत्म हो जाएं। गन्ना खेती की नई तकनीक

​3. बुवाई का सही तरीका (Sowing Method)

​इस नई वैरायटी के लिए हम “रिंग पिट विधि” (Ring Pit) या “ट्रेंच विधि” (Trench Method) का सुझाव देते हैं। पुरानी ‘फ्लैट बेड’ विधि अब पुरानी हो चुकी है।

  • ट्रेंच विधि (नाली विधि): 4 से 5 फीट की दूरी पर गहरी नालियां बनाएं। इससे हवा और धूप गन्ने की जड़ों तक अच्छी तरह पहुँचती है, जिससे गन्ने की मोटाई बढ़ती है।
  • बीज का चुनाव: बीज हमेशा रोग-मुक्त और स्वस्थ होना चाहिए। आँख (Bud) निकालने वाली मशीनों का उपयोग करके केवल ‘आँख’ को लगाएं, पूरा गन्ना दबाने की ज़रूरत नहीं है।
  • बीज उपचार (Seed Treatment): बुवाई से पहले बीज को फफूंदनाशक (जैसे बाविस्टिन) के घोल में 10 मिनट डुबो कर रखें। इससे अंकुरण (Germination) 95% तक होता है।

​4. खाद और उर्वरक प्रबंधन (Fertilizer Management)

​अगर आप चाहते हैं कि गन्ना मोटा और लंबा हो, तो सही समय पर खाद देना ज़रूरी है।

  • बुवाई के समय: NPK (12:32:16), सल्फर और जिंक का प्रयोग करें।
  • पोषक तत्व: गन्ने की बढ़वार के समय (60-90 दिन बाद) ‘सागरिका’ या ‘बायोजाइम’ जैसे ग्रोथ प्रमोटर्स का स्प्रे करें।
  • कैल्शियम नाइट्रेट: गन्ने की मोटाई और वजन बढ़ाने के लिए मिट्टी चढ़ाते समय कैल्शियम नाइट्रेट का उपयोग बहुत फायदेमंद होता है। गन्ना खेती की नई तकनीक

​5. सिंचाई (Irrigation) – ड्रिप सिस्टम का जादू

​इस नई तकनीक में ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई) का बड़ा रोल है। अगर आप ड्रिप लगाते हैं, तो इसके कई फायदे हैं:

  1. ​पानी की 50% तक बचत होती है।
  2. ​खाद (Fertilizer) सीधे जड़ों में दिया जा सकता है (फर्टिगेशन), जिससे पौधे को पूरा पोषण मिलता है।
  3. ​गन्ने का वजन 30% तक बढ़ जाता है।

​अगर ड्रिप की सुविधा नहीं है, तो नाली विधि में हल्का पानी दें, खेत में पानी भरकर न रखें।

​6. देख-भाल और रोग नियंत्रण

​फसल के बीच में खरपतवार (Weeds) को समय पर निकालते रहें।

  • कंसुआ (Shoot Borer): अगर पत्ते में छेद दिखे, तो कोराजन (Coragen) या किसी अच्छे कीटनाशक का स्प्रे करें।
  • मिट्टी चढ़ाना: जब गन्ना 3-4 फीट का हो जाए, तो जड़ों पर मिट्टी चढ़ाना बहुत ज़रूरी है ताकि गन्ना गिरे नहीं और जड़ें मज़बूत रहें। गन्ना खेती की नई तकनीक

​7. कटाई और मुनाफा (Harvesting & Profit)

​इस नई वैरायटी की सबसे बड़ी बात ये है कि ये जल्दी तैयार होती है।

  • पहली कटाई: बुवाई के 9-10 महीने बाद आप पहली कटाई कर सकते हैं।
  • पेड़ी (Ratoon) फसल: कटाई के बाद, जड़ों की अच्छे से देखभाल करने पर दूसरी फसल बिना बुवाई के और भी जल्दी (8 महीने में) तैयार हो जाती है। इस तरह आधुनिक किसान 2 साल के अंदर 3 फसलें तक लेने की कोशिश कर सकते हैं। गन्ना खेती की नई तकनीक

आर्थिक गणित (Economics):

अगर एक एकड़ में 80 से 100 टन का उत्पादन होता है और बाज़ार भाव ₹3000 से ₹3500 प्रति टन मिलता है, तो एक किसान आराम से ₹3 लाख से ₹4 लाख प्रति एकड़ तक की सकल आय (Gross Income) बना सकता है। लागत निकालने के बाद भी शुद्ध मुनाफा परंपरागत खेती से कहीं ज्यादा है।

​निष्कर्ष (Conclusion)

​किसान भाइयों, समय बदल रहा है। अगर हम वही पुराने तरीके अपनाएंगे, तो मुनाफा सीमित रहेगा। इस नई गन्ना खेती की तकनीक को अपनाकर आप कम ज़मीन में ज्यादा पैदावार ले सकते हैं।

​अगर आपको बीज (Seeds) या इस तकनीक के बारे में और अधिक जानकारी चाहिए, तो आप हमारे WhatsApp Group से जुड़ सकते हैं। लिंक नीचे दिया गया है। गन्ना खेती की नई तकनीक

जय जवान, जय किसान!

(नोट: खेती में किसी भी नई दवा या बीज का प्रयोग करने से पहले कृषि विशेषज्ञ की सलाह ज़रूर लें।)

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